
न्यूज़ खबर इंडिया संवाददाता अर्पिता
केराकत जौनपुर। जनपद के केराकत क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने न केवल इंसानियत को झकझोर दिया, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थानागद्दी–मोड़ईला मार्ग पर आसमान पट्टी गांव के पास दो बाइकों की आमने-सामने हुई जोरदार भिड़ंत में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भीषण था कि टक्कर के बाद दोनों बाइक सवार सड़क पर गिरकर तड़पते रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने केवल एक घायल युवक को ऑटो के माध्यम से इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया, जबकि दूसरा घायल युवक काफी देर तक सड़क पर ही दर्द से कराहता रहा।
बताया जा रहा है कि दूसरा घायल युवक, जिसकी पहचान सूरज के रूप में हुई है, लंबे समय तक मदद के इंतजार में सड़क पर पड़ा रहा। जब आसपास के ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ी तो उन्होंने मानवता दिखाते हुए तुरंत एम्बुलेंस को फोन किया। इसके बाद एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल भेजा गया।
घटना के बाद इलाके में लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ग्रामीण समय पर मदद के लिए आगे नहीं आते, तो घायल युवक की जान भी जा सकती थी।
फिलहाल दोनों घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है, जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
इस मामले में जब केराकत के थाना प्रभारी निरीक्षक दीपेंद्र सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार करते हुए कुछ भी कहने से पल्ला झाड़ लिया।
वहीं क्षेत्राधिकारी अजीत कुमार रजक ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या दुर्घटना स्थल पर मौजूद पुलिस की जिम्मेदारी केवल एक घायल को अस्पताल भेजने तक ही सीमित थी?
और क्या दूसरे घायल की जिंदगी की कोई कीमत नहीं थी?

यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता और जिम्मेदारी पर खड़े होते गंभीर सवालों की भी कहानी बन गया है।




