
न्यूज़ खबर इंडिया संवाददाता
वाराणसी (रोहनिया)। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के खिलाफ एक मजबूत संदेश देने का प्रयास किया गया। विद्या फाउंडेशन माधोपुर द्वारा टिकरी गांव में “माँ और माटी” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां महिलाओं और किशोरियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान लड़कियों ने बाल विवाह उन्मूलन और भ्रूण हत्या की रोकथाम जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस नाटक के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि समाज की ताकत हैं और उन्हें शिक्षा व सम्मान मिलना ही चाहिए।
इस आयोजन में 128 स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और किशोरियां शामिल हुईं। कार्यक्रम में महिलाओं को सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे सुमंगला योजना और राष्ट्रीय वयोश्री योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि वे आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बन सकें।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि
जब तक समाज में बाल विवाह और भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाएं खत्म नहीं होंगी, तब तक महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण संभव नहीं है।
संस्था की ओर से महिलाओं को उनके अधिकार, सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण और विकास कार्यक्रम चलाने की योजना भी साझा की गई।
टिकरी गांव की लड़कियों ने अपने अभिनय और संदेश के माध्यम से समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि महिलाओं और किशोरियों के प्रति संवेदनशीलता ही एक बेहतर समाज की पहचान है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था की सचिव स्वाति के साथ-साथ प्रियंका, निशा, गणेश, संदीप और गोपाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अंत में संस्था की ओर से सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।
संदेश साफ था —
अगर समाज को मजबूत बनाना है तो “माँ और माटी” दोनों का सम्मान करना होगा।




