हेड कांस्टेबल दुर्गेश सिंह हत्याकांड, आठ माह बाद दोहराया गया मौत का मंजर, दुर्गेश सिंह हत्याकांड में मिले अहम सबूत
क्राइम सीन रिक्रिएशन कर एफएसएल ने जुटाए मजबूत सुराग

न्यूज़ खबर इंडिया संवाददाता
जौनपुर चंदवक थाना क्षेत्र के खुज्जी तिराहे पर पशु तस्करों द्वारा मुख्य आरक्षी दुर्गेश सिंह को पिकअप वाहन से कुचलकर हत्या किए जाने के मामले में पुलिस ने आठ माह बाद क्राइम सीन रिक्रिएशन कराया। फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से पूरे घटनाक्रम को दोहराया और अहम साक्ष्य संकलित किए। जांच में यह स्पष्ट होगा कि यह घटना कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या तो नहीं थी।
एफएसएल टीम ने मृतक मुख्य आरक्षी दुर्गेश सिंह के वजन के बराबर पुतला तैयार कर उसी स्थान, उसी एंगल और परिस्थितियों में वाहन की गति, दूरी और टक्कर की तीव्रता का परीक्षण किया। टीम ने यह जांचा कि पिकअप वाहन कितनी दूरी से कितनी रफ्तार में चलाया गया और टक्कर कितनी घातक थी। रिक्रिएशन के दौरान मिले साक्ष्य हत्या की मंशा की पुष्टि करते हैं।

गौरतलब है कि 17 मई 2024 की रात लगभग 11 बजकर 50 मिनट पर पशु तस्करों की घेराबंदी के दौरान पशु तस्करों ने पिकअप वाहन को ही हथियार बनाते हुए मुख्य आरक्षी दुर्गेश सिंह पर चढ़ा दिया था। गंभीर रूप से घायल दुर्गेश सिंह को उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई थी।
पुलिस का जवाब भी उतना ही सख्त और निर्णायक रहा
घटना के बाद पुलिस ने व्यापक कार्रवाई करते हुए जिले के 15 थानों की फोर्स के साथ 18 मई की तड़के लगभग 3:30 बजे थाना क्षेत्र के सतमेसरा गांव में मुठभेड़ की। इस दौरान पशु तस्कर सलमान मारा गया, जबकि नरेंद्र यादव और गोलू घायल हो गए थे।

थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह ने बताया कि अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत करने के उद्देश्य से क्राइम सीन रिक्रिएशन कराया गया है, ताकि आरोपी किसी भी स्तर पर घटना को हादसा बताकर बच न सकें। एफएसएल द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य इस मामले को और सुदृढ़ बनाते हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना पूरी गंभीरता से की जा रही है।




