आजमगढ़ में दो अलग-अलग मामलों में सख्त फैसला —
अपहरण व दुष्कर्म में 7 साल की सजा, मंदबुद्धि बालिका से छेड़खानी में 3 साल कारावास

न्यूज़ खबर इंडिया
आजमगढ़
पॉक्सो अदालत ने नाबालिगों के खिलाफ अपराध के दो अलग-अलग मामलों में अहम फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो संतोष कुमार यादव ने सुनवाई पूरी होने के बाद दोनों मामलों में आरोपियों को दोषी करार देते हुए सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
पहला मामला शहर कोतवाली क्षेत्र के रैदोपुर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार 9 मार्च 2013 को एक नाबालिग किशोरी स्कूल गई थी, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटी। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी रामानंद राजभर निवासी पुलिस लाइन के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। जांच के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अवधेश कुमार मिश्रा और दौलत यादव ने आठ गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को अपहरण व दुष्कर्म का दोषी मानते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 8 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
दूसरा मामला बिलरियागंज थाना क्षेत्र का है, जहां 11 वर्षीय मंदबुद्धि बालिका के साथ छेड़खानी की घटना सामने आई थी। पीड़िता के पिता उसे मानपुर निवासी डॉक्टर राकेश लाल श्रीवास्तव के क्लिनिक पर दिखाने ले गए थे। आरोप है कि अकेला पाकर आरोपी ने बालिका के साथ छेड़खानी की।
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने सात गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी डॉक्टर राकेश लाल श्रीवास्तव को दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
दोनों मामलों में अदालत के फैसले को नाबालिगों के खिलाफ अपराध पर कड़ा संदेश माना जा रहा है।




