
न्यूज़ खबर इंडिया संवाददाता अर्पिता
केराकत जौनपुर। जहाँ एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे-बड़े तालाबों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत सरकार की मंशा पर सीधा सवाल खड़ा कर रही है।
मामला जनपद जौनपुर के विकास खंड केराकत अंतर्गत थाना गद्दी ग्राम पंचायत का है। यहाँ एक तालाब का मनरेगा योजना के तहत खुदाई कर जीर्णोद्धार कराया गया। कागजों में यह तालाब संवारा जा चुका है, लेकिन जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
तालाब की पटरियों पर कार्य का बोर्ड तो लगा है, लेकिन लागत कितनी आई, इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इससे पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
सफाई के नाम पर खानापूर्ति!
तालाब के चारों ओर कूड़े का अंबार लगा है। पूरे जलाशय में बड़ी-बड़ी घास उग आई है। साफ-सफाई का कोई अता-पता नहीं। आसपास के लोग खुलेआम कूड़ा फेंक रहे हैं, जबकि तालाब की पटरी पर उपलों की पथाई की जा रही है। यह नजारा साफ दर्शाता है कि रखरखाव पूरी तरह भगवान भरोसे है।
जिम्मेदारों की चुप्पी क्यों?
जब इस संबंध में थाना गद्दी ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान रमाकांत मौर्या से न्यूज़ खबर इंडिया चैनल के संवाददाता ने फोन पर लागत और रखरखाव की जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने फोन पर कोई स्पष्ट जानकारी देने से कतराते हुए “मिलकर बताने” की बात कही और कॉल समाप्त कर दी।
अब सवाल यह उठता है कि अगर सब कुछ पारदर्शी है तो जानकारी देने में हिचकिचाहट क्यों?
क्या मनरेगा के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की गई?

क्या जिम्मेदार अधिकारी इस बदहाल स्थिति का संज्ञान लेंगे?
ग्रामीणों में भी इस लापरवाही को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि अगर समय रहते निगरानी और नियमित सफाई न हुई तो तालाब फिर से अतिक्रमण और गंदगी की भेंट चढ़ जाएगा।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर यह तालाब भी सिर्फ फाइलों में ही “सुंदर और स्वच्छ” बना




