80 दिन की फरारी का अंत: गोबरा हत्याकांड का आरोपी बिल्लू कोर्ट में सरेंडर, पुलिस के दबाव ने तोड़ी कमर
मुनादी, कुर्की की चेतावनी और लगातार दबिश के दबाव में झुका आरोपी, सीजेएम कोर्ट में किया आत्मसमर्पण

न्यूज़ खबर इंडिया संवाददाता अर्पिता
केराकत /जौनपुर। जिले के चर्चित गोबरा सच्चिदानंद मिश्र हत्याकांड में आखिरकार पुलिस की लगातार कार्रवाई और न्यायालय के सख्त रुख के आगे फरार चल रहे आरोपी सूर्यकान्त मिश्र उर्फ बिल्लू को घुटने टेकने पड़े। करीब 80 दिनों से फरार चल रहे आरोपी ने गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) श्वेता यादव की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय ने उसे तत्काल न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
गौरतलब है कि 15 मार्च 2026 को गोबरा गांव निवासी सच्चिदानंद मिश्र की कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था। मामले में विष्णु मिश्र, ताड़कनाथ मिश्र और सूर्यकान्त मिश्र समेत नौ लोगों को नामजद किया गया था।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी विष्णु मिश्र और ताड़कनाथ मिश्र को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन सूर्यकान्त मिश्र उर्फ बिल्लू घटना के बाद से लगातार फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए चंदवक पुलिस की टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आ रहा था।
इसी बीच 30 मई को न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने आरोपी के घर पहुंचकर डुगडुगी बजवाकर मुनादी कराई। गांव में सार्वजनिक उद्घोषणा करते हुए आरोपी को निर्धारित समय सीमा के भीतर न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया। साथ ही साफ चेतावनी दी गई कि यदि वह हाजिर नहीं हुआ तो उसकी चल-अचल संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
पुलिस की लगातार दबिश, मुनादी और कुर्की की तलवार लटकने के बाद फरार आरोपी पर दबाव बढ़ता चला गया। आखिरकार पुलिस की रणनीति और कानूनी शिकंजे के सामने आरोपी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सका और उसे अदालत की शरण लेनी पड़ी।
क्षेत्र में चर्चा है कि चंदवक पुलिस ने हार नहीं मानी और लगातार दबाव बनाए रखा, जिसका नतीजा यह रहा कि 80 दिन से फरार आरोपी को अंततः कोर्ट में सरेंडर करना पड़ा।
अब आरोपी के जेल पहुंचने के बाद पुलिस और अभियोजन पक्ष मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेज करने की तैयारी में जुट गया है। गोबरा हत्याकांड में यह आत्मसमर्पण जांच और मुकदमे की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।




