
न्यूज़ खबर इंडिया संवाददाता अनिल कुमार पाण्डेय
डोभी/जौनपुर। जनपद के विकास क्षेत्र डोभी कार्यालय के बगल में बनी “नेकी की दीवार” इन दिनों अपनी मूल भावना से भटकती नजर आ रही है। जरूरतमंदों की सहायता के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल अब अव्यवस्था और लापरवाही का उदाहरण बनती जा रही है।
जहां इस स्थान को समाज सेवा और मानवता का प्रतीक होना चाहिए था, वहीं अब यहां पुराने कपड़ों का ढेर बेतरतीब तरीके से पड़ा दिखाई दे रहा है। कपड़ों को व्यवस्थित ढंग से टांगने के बजाय सड़क किनारे और आसपास फेंक दिया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र गंदगी का शिकार हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “नेकी की दीवार” का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों तक उपयोगी वस्तुएं पहुंचाना था, लेकिन देखरेख के अभाव में यह जगह अब कूड़ाघर जैसी प्रतीत होने लगी है। बारिश और तेज हवा के चलते कपड़े खराब होकर सड़ने लगते हैं, जिससे दुर्गंध फैलने के साथ पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदार स्वयंसेवी संस्थाओं और समाजसेवियों की भूमिका को लेकर उठ रहा है। आखिर जब इस पहल की शुरुआत की गई थी, तो इसकी नियमित निगरानी और साफ-सफाई की व्यवस्था क्यों नहीं सुनिश्चित की गई?
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि यहां कपड़ों को रखने के लिए उचित स्टैंड या अलमारी की व्यवस्था की जाए, नियमित सफाई कराई जाए तथा जरूरतमंदों तक सामग्री का सही ढंग से वितरण सुनिश्चित हो।
यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो “नेकी की दीवार” अपनी पहचान खोकर लापरवाही का प्रतीक बनकर रह जाएगी। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार संस्थाएं और समाजसेवी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हैं या नहीं।




