
न्यूज खबर इंडिया संवाददाता
श्रावस्ती। में मुहर्रम के दिन एक ओर जहां मातमी जुलूस निकल रहे थे, वहीं दूसरी ओर सड़क किनारे प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला बेबस पड़ी थी। राहगीर आते-जाते रहे, लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया। ऐसे कठिन समय में इकौना की रहने वाली मन्नू देवी ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने मानवता पर भरोसा और मजबूत कर दिया।
मन्नू देवी ने न केवल पीड़ित महिला को संभाला, बल्कि उसके साथ मौजूद बच्चों की भी देखभाल की। उन्होंने तत्काल एम्बुलेंस बुलवाई और गर्भवती को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया। महिला की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां भी स्थिति नाजुक देख चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज, बहराइच भेज दिया।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि संकट की घड़ी में सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है। मन्नू देवी की संवेदनशीलता और तत्परता की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। समय रहते मिली मदद से गर्भवती और उसके होने वाले बच्चे की जान बचाने की उम्मीद बनी हुई




