
न्यूज़ खबर इंडिया संवाददाता अनिल पाण्डेय
चन्दवक/ जौनपुर। ग्राम पंचायत रामगढ़ अंतर्गत आदि गंगा गोमती के पावन तट पर स्थित कोटि तीर्थ वाराह धाम में महंत श्री पंकज दास जी के नेतृत्व में संत समागम एवं संत भंडारे का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के सैकड़ों संत-महात्मा एवं श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम के दौरान महंत पंकज दास जी ने बताया कि कोटि तीर्थ वाराह धाम एक प्राचीन सिद्ध पीठ है, जहां पूर्व समय में गुरुकुल संचालित होता था। इस गुरुकुल में बच्चों को वेद, वेदांत एवं सनातन धर्म की शिक्षा दी जाती थी। उन्होंने बताया कि महान संत शिरोमणि स्वामी अचला नन्द जी महाराज के ब्रह्मलीन होने के बाद यह परंपरा धीरे-धीरे समाप्त हो गई थी।
महंत पंकज दास जी ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति और शिक्षा परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से अब यहां पुनः गुरुकुल की शुरुआत की जा रही है। प्रस्तावित गुरुकुल में 8 से 12 वर्ष तक के बच्चों को वेद-वेदांत के साथ-साथ गणित, विज्ञान एवं अन्य विषयों की शिक्षा योग्य आचार्यों द्वारा प्रदान की जाएगी।
इस संत समागम में महंत अरुण दास जी (गौरी गोरखा कुटी), महंत धनुष धारी जी महाराज (श्री राम जानकी मंदिर, कोनिया), महंत विधि भूषण जी महाराज (काली माताv मंदिर, नमो घाट), कोतवाल मोहन दास जी महाराज (डुमरी पड़ाव) एवं महंत सुरेश दास जी (नाटी इमली) सहित सैकड़ों संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में गुरुकुल के प्रस्तावित प्राचार्य अभिषेक चौबे, आचार्य रुद्रांश शर्मा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया।
धार्मिक आस्था, परंपरा और शिक्षा के संगम के रूप में यह आयोजन क्षेत्र में नई ऊर्जा और जागरूकता का संदेश देकर गया। गुरुकुल की पुनः स्थापना की पहल को लोगों ने सराहनीय कदम बताया।




